शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2026
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ट्रंप के 2020 चुनाव-दखल आरोप को चीन ने खारिज किया

चीन ने डोनाल्ड ट्रंप के 2020 अमेरिकी चुनाव में दखल के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि बीजिंग ने अमेरिकी चुनावों में कभी हस्तक्षेप नहीं किया।

ट्रंप के चुनावी आरोपों पर चीन की प्रतिक्रिया को दर्शाता प्रतिनिधि संपादकीय दृश्य
ट्रंप के 2020 चुनाव-दखल आरोपों पर चीन ने औपचारिक प्रतिक्रिया में आरोपों को खारिज किया। यह प्रतिनिधि संपादकीय दृश्य है।

बीजिंग: चीन ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस आरोप को खारिज कर दिया है जिसमें उन्होंने 2020 के अमेरिकी चुनाव में चीन की कथित दखलअंदाजी और अमेरिकी वोटर डेटा हासिल करने की बात कही थी। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने शुक्रवार, 17 जुलाई 2026 को बीजिंग में नियमित प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि आरोप “पूरी तरह गढ़े गए” हैं और चीन को अमेरिकी चुनावों में हस्तक्षेप करने में कोई रुचि नहीं है।

यह प्रतिक्रिया ट्रंप के 16 जुलाई 2026 की रात व्हाइट हाउस से दिए गए चुनाव-सुरक्षा संबोधन के बाद आई है। ट्रंप और व्हाइट हाउस ने दावा किया कि 2020 चुनाव चक्र से शुरू हुए वर्षों में चीन ने 22 करोड़ अमेरिकी वोटर फाइलें हासिल कीं। व्हाइट हाउस ने इसे चुनावी डेटा से जुड़ा बड़ा सुरक्षा मुद्दा बताया और इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग सिस्टम, वोटर डेटा, मिशिगन की वोटर-रजिस्ट्रेशन जांच तथा गैर-नागरिकों के नाम वोटर रोल में होने से जुड़े दस्तावेज जारी किए।

ट्रंप के भाषण पर TNX ने पहले ट्रंप के चुनावी दस्तावेज और SAVE Act वाले संबोधन में रिपोर्ट किया था। शुक्रवार का नया विकास यह है कि अब बीजिंग ने औपचारिक जवाब देते हुए आरोपों को अमेरिकी घरेलू चुनावी राजनीति से जोड़ा है।

चीन ने क्या कहा

AP और EFE की रिपोर्टों के अनुसार, लिन जियान ने कहा कि चीन दूसरे देशों के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करने के सिद्धांत पर चलता है और उसने अमेरिकी चुनावों में कभी दखल नहीं दिया। उन्होंने अमेरिका से कहा कि वह चीन के खिलाफ “निराधार आरोप” लगाना बंद करे और चीन को चुनावी मुद्दा न बनाए।

जब उनसे पूछा गया कि क्या यह विवाद चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की सितंबर 2026 में संभावित अमेरिका यात्रा पर असर डाल सकता है, तो लिन ने सीधे कोई नया संकेत नहीं दिया। उन्होंने दोहराया कि अमेरिका को चीन-अमेरिका संबंधों के लिए अनुकूल काम करना चाहिए। AP के मुताबिक, ट्रंप ने मई 2026 में बीजिंग यात्रा के दौरान शी से मुलाकात की थी और बाद में शी की अमेरिका यात्रा की बात सामने आई थी।

ट्रंप का दावा और पुराना अमेरिकी निष्कर्ष

व्हाइट हाउस की चुनाव-सुरक्षा वेबसाइट पर जारी सामग्री में दावा है कि चीन ने नाम, पते, फोन नंबर, राजनीतिक दल की प्राथमिकता और अन्य वोटर-रजिस्ट्रेशन डेटा हासिल किया। लेकिन स्वतंत्र फैक्ट-चेक में यह सवाल उठाया गया है कि वोटर रजिस्ट्रेशन डेटा का मिलना अपने-आप चुनावी दखल या वोट बदलने का प्रमाण नहीं बनता। PolitiFact ने लिखा कि कुछ दस्तावेजों में 2013 से 2021 की वोटर रजिस्ट्रेशन जानकारी को व्यावसायिक वेबसाइटों से उपलब्ध बताया गया और विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे डेटा तक पहुंच कई स्थितियों में सामान्य या वैध खरीद के जरिए भी हो सकती है।

महत्वपूर्ण बात यह है कि 2021 में अमेरिकी न्याय विभाग और गृह सुरक्षा विभाग की संयुक्त समीक्षा ने कहा था कि किसी विदेशी सरकार से जुड़े अभिनेता द्वारा 2020 के चुनाव परिणामों में हेरफेर करने या चुनाव की अखंडता से समझौता करने का कोई प्रमाण नहीं मिला। उसी अवधि की खुफिया समुदाय की सार्वजनिक रिपोर्ट में भी यह आकलन था कि चीन ने नतीजा बदलने के लिए प्रभाव-प्रयास तैनात नहीं किए, हालांकि एक अल्पमत आकलन ने चीन की कुछ सीमित राजनीतिक गतिविधियों पर अलग राय दर्ज की थी।

क्यों अहम है यह अपडेट

यह मामला अब सिर्फ अमेरिकी चुनावी बहस नहीं रहा; चीन की औपचारिक प्रतिक्रिया ने इसे कूटनीतिक विवाद का रूप दे दिया है। अमेरिका में नवंबर 2026 के मध्यावधि चुनावों से पहले ट्रंप चुनावी नियमों को सख्त करने के लिए SAVE America Act पर जोर दे रहे हैं। चीन पर आरोप उसी राजनीतिक अभियान का हिस्सा बन गए हैं, जबकि बीजिंग इसे अमेरिका की घरेलू राजनीति में चीन का नाम घसीटने की कोशिश बता रहा है।

आगे नजर दो बातों पर रहेगी: पहली, व्हाइट हाउस के जारी दस्तावेजों से क्या कोई स्वतंत्र जांच ऐसा प्रमाण निकालती है जो वोटों या परिणामों पर असर दिखा सके; दूसरी, क्या यह बयानबाजी सितंबर 2026 में प्रस्तावित उच्च-स्तरीय चीन-अमेरिका संपर्कों के माहौल को और बिगाड़ती है। अभी तक पुष्टि इतनी है कि ट्रंप ने गंभीर आरोप लगाए हैं, चीन ने उन्हें खारिज किया है, और पहले के अमेरिकी आधिकारिक निष्कर्ष 2020 के नतीजों में विदेशी हेरफेर का प्रमाण नहीं बताते।

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