शंघाई में शुक्रवार, 17 जुलाई 2026 को World AI Conference (WAIC) के उद्घाटन सत्र में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर किसी एक देश के प्रभुत्व के खिलाफ स्पष्ट राजनीतिक संदेश दिया। शी ने कहा कि AI विकास को अंतरराष्ट्रीय सहयोग की दिशा में जाना चाहिए, न कि किसी एक शक्ति-केंद्र के नियंत्रण में।
शी ने अपने भाषण में कहा, “AI development should not be a solo performance by a single country, but a symphony of international cooperation.” उन्होंने AI के क्षेत्र में राष्ट्रीय सुरक्षा की अवधारणा को बहुत दूर तक खींचने और एक देश की सुरक्षा को दूसरों की सुरक्षा से ऊपर रखने के रुझान का विरोध करने की बात भी कही।
यह बयान इसलिए अहम है क्योंकि इससे एक दिन पहले, 16 जुलाई 2026 को, शंघाई में 29 देशों ने World Artificial Intelligence Cooperation Organization (WAICO) बनाने के समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। TNX ने उस समझौते को पहले कवर किया था। अब शी के भाषण ने उसी पहल को चीन की शीर्ष-स्तरीय AI शासन रणनीति का रूप दे दिया है।
क्या बदला
गुरुवार के समझौते में चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने चीन की ओर से हस्ताक्षर किए। उपलब्ध आधिकारिक और समाचार एजेंसी रिपोर्टों के अनुसार, कजाकिस्तान, लाओस, पाकिस्तान, रूस और इंडोनेशिया सहित 29 देशों के प्रतिनिधि WAICO के संस्थापक सदस्य बने। संगठन का मुख्यालय शंघाई में रखने की बात कही गई है।
शुक्रवार को शी ने इसी ढांचे को बड़े भू-राजनीतिक संदेश से जोड़ा। उनका जोर था कि AI तक पहुंच, क्षमता निर्माण और शासन-नियम केवल कुछ विकसित देशों या बड़ी टेक कंपनियों के हाथ में सीमित नहीं रहने चाहिए। उन्होंने ‘people-centred’ यानी मानव-केंद्रित AI विकास की बात रखी और विकासशील देशों के लिए AI क्षमता तक न्यायपूर्ण पहुंच को जरूरी बताया।
WAIC 2026 17 से 20 जुलाई तक शंघाई में आयोजित हो रहा है। शंघाई नगरपालिका की पूर्व-घोषणा के मुताबिक सम्मेलन में 140 से अधिक थीम फोरम, 1,400 से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय अतिथि, 1,100 से अधिक कंपनियां और करीब 3,000 प्रदर्शनी उत्पाद शामिल हैं। 300 से अधिक AI उत्पादों के वैश्विक डेब्यू की बात भी आयोजकों ने कही थी।
अमेरिका-चीन AI मुकाबले का संदर्भ
शी का बयान सीधे तौर पर अमेरिका का नाम लिए बिना उस बहस को छूता है जिसमें advanced chips, बड़े AI मॉडल, cloud access और AI safety rules पर अमेरिका और चीन अलग-अलग रास्ते पेश कर रहे हैं। अमेरिका और यूरोपीय संघ चीनी टेक आयातों और advanced AI/semiconductor supply chain पर राष्ट्रीय सुरक्षा के आधार पर कई तरह की पाबंदियां लगा चुके हैं। चीन इसे तकनीकी असमानता और ‘AI divide’ के सवाल से जोड़ रहा है।
चीन की दलील है कि उसके कम लागत वाले और कई मामलों में open-source AI मॉडल विकासशील देशों और विदेशी कंपनियों के लिए विकल्प बन सकते हैं। इसी सम्मेलन में Huawei के Atlas 950 supernode और Moonshot AI के Kimi K3 जैसे उत्पादों पर भी ध्यान गया है। ये लॉन्च चीन की उस कोशिश का हिस्सा हैं जिसमें वह Nvidia-केंद्रित अमेरिकी hardware ecosystem पर निर्भरता घटाने और अपना घरेलू AI stack मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।
फिर भी, यह केवल तकनीकी प्रदर्शन नहीं है। WAICO और शी का भाषण मिलकर यह संकेत देते हैं कि चीन AI standards, safety norms और capacity-building में भी संस्थागत भूमिका चाहता है। पश्चिमी ढांचे अक्सर rights, safety और trusted partners की भाषा में बात करते हैं; चीन इस मंच पर sovereignty, development और wider access की भाषा आगे कर रहा है।
आगे क्या देखना होगा
WAIC 20 जुलाई 2026 तक चलेगा। अब ध्यान इस बात पर रहेगा कि WAICO की सदस्यता कितनी तेजी से बढ़ती है, उसका शासन ढांचा कैसा बनता है, और क्या यह संगठन AI safety, data, model access और military use जैसे कठिन सवालों पर वास्तविक नियम बना पाता है या केवल राजनीतिक मंच बनकर रह जाता है।
फिलहाल इतना साफ है कि शंघाई सम्मेलन ने AI शासन की बहस को नई धार दी है। 29 देशों वाले समझौते के बाद शी का भाषण चीन की तरफ से यह दावा है कि AI के भविष्य के नियम सिर्फ वॉशिंगटन, ब्रसेल्स या सिलिकॉन वैली में तय नहीं होंगे।



