दुबई: अमेरिका और ईरान के बीच टकराव ने गुरुवार को नया और अधिक खतरनाक मोड़ लिया। अमेरिकी हमलों का दायरा पहली बार इस दौर में तेहरान के आसपास और ईरान के उत्तरी हिस्सों तक पहुंचा। अमेरिकी सेना ने एक ऐसे तेल टैंकर को भी निष्क्रिय करने की बात कही जिसे वह नौसैनिक नाकेबंदी तोड़ने की कोशिश कर रहा जहाज बता रही है। जवाब में ईरान ने बहरीन, जॉर्डन और कुवैत की ओर मिसाइल और ड्रोन दागे, जहां अमेरिकी सैन्य मौजूदगी है।
ईरानी अधिकारियों के अनुसार हालिया अमेरिकी हमलों में 35 से अधिक लोग मारे गए और 300 से ज्यादा घायल हुए हैं। स्वतंत्र रूप से सभी दावों की पुष्टि कठिन है। हमले सेमनान प्रांत तक पहुंचे, जिसे ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल और अंतरिक्ष कार्यक्रम से जोड़ा जाता है। तेहरान ने चेतावनी दी है कि उसके पुलों या बिजली संयंत्रों पर हमला हुआ तो क्षेत्रीय बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया जा सकता है।
होर्मुज फिर संघर्ष का केंद्र
फारस की खाड़ी को खुले समुद्र से जोड़ने वाला होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति की सबसे संवेदनशील नसों में से एक है। अमेरिका ने नाकेबंदी दोबारा लागू की है, जबकि ईरान अमेरिकी नियंत्रण वाले मार्ग से गुजरने वाले जहाजों को चुनौती दे रहा है। अमेरिकी सेना के अनुसार चेतावनी नजरअंदाज करने पर कुराकाओ-ध्वज वाले टैंकर के धुएं की चिमनी पर मिसाइल दागकर उसे रोका गया।
ईरान ने कई क्षेत्रीय देशों की ओर हमला किया, हालांकि शुरुआती रिपोर्टों में बड़े नुकसान या हताहत की तत्काल पुष्टि नहीं हुई। इराक के कुर्द क्षेत्र इरबिल के पास भी ड्रोन रोके जाने की खबर आई। इतनी अलग-अलग जगहों पर गतिविधि यह दिखाती है कि संघर्ष दो देशों की सीमा से बहुत बाहर फैल सकता है।
भारत और दुनिया पर असर
Brent कच्चा तेल गुरुवार को 85 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर कारोबार कर रहा था—युद्ध से पहले के स्तर से करीब 15 प्रतिशत अधिक। समुद्री मार्ग लंबे समय तक बाधित हुआ तो तेल, उर्वरक, मालभाड़ा और बीमा की लागत फिर बढ़ सकती है। भारत जैसे बड़े तेल आयातक के लिए इसका असर रुपये, ईंधन बिल और महंगाई तक पहुंचता है। खाड़ी देशों में रहने वाले लाखों भारतीयों की सुरक्षा भी चिंता का विषय बनेगी।
पाकिस्तान सहित मध्यस्थ देश बातचीत की कोशिश जारी रखे हुए हैं, लेकिन जमीन पर हमले बढ़ने से कूटनीति की गुंजाइश सिकुड़ रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने समझौते की संभावना खुली होने की बात कही, पर ठोस शर्तें सामने नहीं आईं। फिलहाल सबसे बड़ा जोखिम गलत आकलन है—किसी जहाज, सैन्य ठिकाने या नागरिक ढांचे पर बड़ा नुकसान ऐसी प्रतिक्रिया शुरू कर सकता है जिसे रोकना दोनों पक्षों के लिए कठिन हो।
तथ्य-स्रोत: Associated Press और आकाशवाणी समाचार, 16 जुलाई 2026। युद्ध संबंधी शुरुआती दावे बदल सकते हैं। चित्र AI-निर्मित सांकेतिक संपादकीय दृश्य है।



