नई दिल्ली: भारत में 100 करोड़ से अधिक लोग अब किसी न किसी सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था के दायरे में हैं। केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया के अनुसार कवरेज 2015 के 19 प्रतिशत से बढ़कर 2026 में 68.4 प्रतिशत हो गया है। संख्या अपने आप में बड़ी है, लेकिन इसकी असली अहमियत यह समझने में है कि ‘कवरेज’ किन योजनाओं, किस अवधि और कितनी वास्तविक सुरक्षा को दर्शाता है।
सामाजिक सुरक्षा में पेंशन, स्वास्थ्य सहायता, खाद्य सुरक्षा, मातृत्व लाभ, दुर्घटना बीमा, कर्मचारी भविष्य निधि और असंगठित श्रमिकों के लिए अलग-अलग योजनाएं शामिल हो सकती हैं। एक व्यक्ति एक से अधिक योजना में दर्ज हो सकता है, इसलिए कुल लाभार्थियों और विशिष्ट व्यक्तियों की गणना का तरीका साफ होना जरूरी है। सरकार का 100 करोड़ का आंकड़ा सामाजिक संरक्षण ढांचे से जुड़े लोगों को दर्शाता है।
सबसे बड़ा बदलाव असंगठित क्षेत्र में
भारत का बड़ा श्रमबल खेत, निर्माण, घरेलू काम, छोटे कारोबार और गिग प्लेटफॉर्म जैसे असंगठित क्षेत्रों में है। नियमित वेतन, बीमा और पेंशन की गारंटी यहां अक्सर नहीं होती। डिजिटल पहचान, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण और राष्ट्रीय स्तर के श्रमिक डेटाबेस ने योजनाओं तक पहुंच बढ़ाने में मदद की है, लेकिन नौकरी बदलने या राज्य बदलने पर लाभ की पोर्टेबिलिटी अभी भी महत्वपूर्ण चुनौती है।
कवरेज का विस्तार तभी मजबूत सुरक्षा बनेगा जब लाभ पर्याप्त और समय पर मिले। किसी योजना में नाम दर्ज होना और बीमारी, दुर्घटना या आय रुकने के समय वास्तविक आर्थिक सहारा मिलना दो अलग बातें हैं। शिकायत निवारण, स्थानीय सहायता केंद्र और सरल दावा प्रक्रिया इस अंतर को कम कर सकते हैं।
अब गुणवत्ता की कसौटी
68.4 प्रतिशत की पहुंच नीति के लिए बड़ा आधार देती है। अगला सवाल शेष आबादी तक पहुंच का है—विशेषकर प्रवासी श्रमिक, बिना दस्तावेज वाले कामगार, अकेली महिलाएं और डिजिटल सेवाओं से दूर बुजुर्ग। योजनाओं के बीच डेटा का तालमेल डुप्लीकेट रिकॉर्ड घटा सकता है, लेकिन निजता और सहमति की सुरक्षा भी उतनी ही जरूरी है।
सामाजिक सुरक्षा केवल कल्याण का खर्च नहीं, अर्थव्यवस्था के लिए स्थिरता का निवेश भी है। बीमारी या रोजगार संकट में परिवार को न्यूनतम सुरक्षा मिले तो उसे कर्ज, बच्चों की पढ़ाई छोड़ने या संपत्ति बेचने जैसे कठोर फैसलों से बचाया जा सकता है। 100 करोड़ का पड़ाव इसलिए उत्सव के साथ स्वतंत्र मूल्यांकन और पारदर्शी डेटा की मांग भी करता है।
तथ्य-स्रोत: केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री के वक्तव्य पर आधारित आकाशवाणी समाचार, 16 जुलाई 2026। चित्र AI-निर्मित सांकेतिक संपादकीय दृश्य है।



