नई दिल्ली: विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार, 17 जुलाई 2026 को स्पष्ट किया कि ईरान के चाबहार पोर्ट में भारत से जुड़े शाहिद बेहेश्ती टर्मिनल को हालिया अमेरिकी हमलों में कोई नुकसान नहीं हुआ है। मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने नई दिल्ली में नियमित मीडिया ब्रीफिंग के दौरान कहा कि भारत ने चाबहार पर हमले से जुड़ी रिपोर्टें देखी हैं, लेकिन उपलब्ध जानकारी के आधार पर टर्मिनल सुरक्षित है।
यह स्पष्टीकरण ऐसे समय आया है जब अमेरिकी हमलों में चाबहार पोर्ट के एक निगरानी टावर के गिरने की खबरें सामने आईं। अंतरराष्ट्रीय एजेंसी AP के अनुसार, अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने पुष्टि की कि अमेरिकी बलों ने 16 जुलाई को चाबहार के शाहिद कलंतरी पोर्ट क्षेत्र में एक निगरानी टावर को निशाना बनाया। भारत से जुड़ा शाहिद बेहेश्ती टर्मिनल अलग सुविधा है, जिसे भारत और ईरान ने क्षेत्रीय कनेक्टिविटी के लिए विकसित किया है।
क्या पुष्टि हुई और क्या नहीं
अब तक भारतीय पक्ष की पुष्टि केवल इतनी है कि शाहिद बेहेश्ती टर्मिनल को नुकसान नहीं हुआ। विदेश मंत्रालय ने यह नहीं कहा कि पूरे चाबहार परिसर में कोई हमला नहीं हुआ। अमेरिकी और अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों में जिस टावर के ध्वस्त होने का उल्लेख है, वह चाबहार के दूसरे हिस्से से संबंधित बताया गया है। इसलिए इस समय तथ्यात्मक स्थिति यह है कि चाबहार क्षेत्र में अमेरिकी कार्रवाई की रिपोर्टें पुष्ट हैं, लेकिन भारत-समर्थित टर्मिनल के क्षतिग्रस्त होने की बात पुष्ट नहीं है।
हिंदुस्तान टाइम्स के अनुसार, जायसवाल ने यह भी दोहराया कि पश्चिम एशिया के संघर्ष में नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए। यह टिप्पणी भारत की उस सावधान कूटनीतिक स्थिति के अनुरूप है जिसमें नई दिल्ली ईरान, अमेरिका और खाड़ी क्षेत्र में अपने ऊर्जा, व्यापार और सुरक्षा हितों को संतुलित करने की कोशिश कर रही है।
भारत के लिए चाबहार क्यों अहम है
चाबहार पोर्ट भारत के लिए केवल एक बंदरगाह परियोजना नहीं है। यह पाकिस्तान को बायपास करते हुए अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक पहुंच का वैकल्पिक मार्ग देता है। भारत और ईरान ने 2024 में चाबहार के शाहिद बेहेश्ती टर्मिनल के विकास और संचालन से जुड़ी दीर्घकालिक व्यवस्था पर काम आगे बढ़ाया था। इस परियोजना को International North-South Transport Corridor यानी INSTC से जोड़कर भी देखा जाता है।
यही कारण है कि चाबहार पर किसी भी सैन्य कार्रवाई की खबर नई दिल्ली में तुरंत संवेदनशील बन जाती है। इससे पहले पश्चिम एशिया में अमेरिकी-ईरानी तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य के संकट पर TNX ने तेहरान तक पहुंचे अमेरिकी हमलों और होर्मुज संकट की रिपोर्ट प्रकाशित की थी। इसी क्षेत्रीय तनाव के बीच बुशेहर परमाणु संयंत्र परिसर में नुकसान के संकेत भी सामने आए थे।
प्रतिबंध और आगे की बातचीत
चाबहार को लेकर भारत की चुनौती केवल सुरक्षा नहीं है। अमेरिकी प्रतिबंधों से जुड़ी छूट, जिसने भारत की परियोजना भागीदारी को कुछ समय तक बचाए रखा था, अप्रैल 2026 के अंत में समाप्त हो चुकी है। जायसवाल ने कहा कि छूट खत्म होने के बाद भारत संबंधित पक्षों से आगे की व्यवस्था पर बातचीत कर रहा है।
Economic Times ने भारतीय अधिकारियों के हवाले से बताया कि नई दिल्ली चाबहार में अपने हितों की रक्षा के विकल्पों पर ईरानी पक्ष और अन्य हितधारकों से बात कर रही है। इसमें ऐसी व्यवस्था भी चर्चा में बताई गई है जिसमें स्थानीय प्रबंधन के साथ भारत के अधिकारों को भविष्य में सुरक्षित रखने की कानूनी गारंटी हो। इस हिस्से की आधिकारिक अंतिम घोषणा अभी नहीं हुई है।
अगला संकेत दो मोर्चों से आएगा: पहला, क्या अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव घटता है या चाबहार और अन्य बंदरगाहों पर हमले जारी रहते हैं; दूसरा, क्या भारत चाबहार में अपनी मौजूदगी और निवेश को प्रतिबंध जोखिमों से बचाने के लिए कोई नई औपचारिक व्यवस्था घोषित करता है। फिलहाल MEA का मुख्य संदेश यही है कि भारत-समर्थित शाहिद बेहेश्ती टर्मिनल सुरक्षित है और नई दिल्ली स्थिति पर नजर रखे हुए है।



