वेस्ट इंडीज के महान ऑलराउंडर सर गैरी सोबर्स का 17 जुलाई 2026 को निधन हो गया। वे 89 वर्ष के थे। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) ने शुक्रवार को उनके निधन की पुष्टि करते हुए बताया कि वेस्ट इंडीज के इस दिग्गज ने 1954 से 1974 तक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपनी अमिट छाप छोड़ी। क्रिकेट वेस्ट इंडीज ने भी सोशल मीडिया पर श्रद्धांजलि देते हुए लिखा, “A great innings has come to an end.”
निधन की सही घड़ी और कारण अभी तक सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। NDTV Sports ने उनके बेटे डेनियल के हवाले से बताया कि सोबर्स ने बारबाडोस स्थित अपने घर पर अंतिम सांस ली। सोबर्स 28 जुलाई 1936 को जन्मे थे और अपने 90वें जन्मदिन से महज कुछ दिन दूर थे।
सर गारफील्ड सेंट ऑब्रन सोबर्स, जिन्हें दुनिया गैरी सोबर्स के नाम से जानती है, क्रिकेट इतिहास के उन गिने-चुने खिलाड़ियों में रहे जिन्होंने बल्लेबाजी, गेंदबाजी, क्षेत्ररक्षण और कप्तानी – चारों क्षेत्रों में खेल की परिभाषा बदल दी। बाएं हाथ के इस बल्लेबाज ने गेंद से भी उतनी ही बहुआयामी प्रतिभा दिखाई: तेज-मध्यम गति से लेकर ऑर्थोडॉक्स स्पिन और कलाई की स्पिन तक, हर हथियार उनके पास था।
रिकॉर्ड, जो पीढ़ियों तक याद रहा
सोबर्स ने वेस्ट इंडीज के लिए 93 टेस्ट खेले और 57.78 की औसत से 8,032 रन बनाए, जिनमें 26 शतक शामिल थे। गेंद से उन्होंने 235 टेस्ट विकेट लिए। 1958 में पाकिस्तान के खिलाफ किंग्स्टन में उनका नाबाद 365 रन का स्कोर टेस्ट क्रिकेट का सबसे बड़ा व्यक्तिगत स्कोर बना और यह रिकॉर्ड 36 साल तक कायम रहा, जब तक 1994 में ब्रायन लारा ने इसे नहीं तोड़ा।
उनकी सबसे मशहूर उपलब्धियों में 1968 का वह ओवर भी शामिल है, जब नॉटिंघमशायर की ओर से खेलते हुए उन्होंने ग्लैमोर्गन के मैल्कम नैश के एक ओवर में छह छक्के जड़े। प्रथम श्रेणी क्रिकेट में लगातार छह गेंदों पर छह छक्के लगाने वाले वे पहले बल्लेबाज बने। इस पारी ने सोबर्स को सिर्फ एक महान खिलाड़ी नहीं, बल्कि क्रिकेट की लोककथा का हिस्सा बना दिया।
बारबाडोस से विश्व क्रिकेट तक
सोबर्स ने 1953 में महज 16 वर्ष की उम्र में बारबाडोस के लिए प्रथम श्रेणी क्रिकेट में कदम रखा। अगले ही साल, 17 साल की उम्र में उन्होंने वेस्ट इंडीज के लिए टेस्ट पदार्पण किया। शुरुआत में उनकी पहचान एक गेंदबाज के रूप में बनी, लेकिन जल्द ही उनकी बल्लेबाजी ने उन्हें खेल के सबसे संपूर्ण क्रिकेटरों की कतार में ला खड़ा किया।
1974 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से विदा लेने तक वे वेस्ट इंडीज की उस पहचान का प्रमुख चेहरा बन चुके थे, जिसने कैरेबियाई क्रिकेट को विश्व मंच पर ताकत, शैली और आत्मविश्वास दिया। वे वेस्ट इंडीज के कप्तान भी रहे और काउंटी क्रिकेट में नॉटिंघमशायर के लिए भी एक अहम नाम बने।
सम्मान और विरासत
क्रिकेट सेवाओं के लिए सोबर्स को 1975 में नाइटहुड मिला। विजडन ने उन्हें 20वीं सदी के पांच महान क्रिकेटरों में शामिल किया। ICC आज भी साल के सर्वश्रेष्ठ पुरुष क्रिकेटर को सर गारफील्ड सोबर्स ट्रॉफी प्रदान करता है, जो उनकी विरासत की संस्थागत पहचान बन चुकी है।
निधन के बाद क्रिकेट जगत से श्रद्धांजलियों का सिलसिला शुरू हो गया। BCCI ने उन्हें खेल का सच्चा आइकन और महानतम ऑलराउंडरों में से एक बताया, जबकि नॉटिंघमशायर ने उन्हें अपने इतिहास की प्रतिष्ठित शख्सियत करार दिया। वेस्ट इंडीज और बारबाडोस के लिए यह सिर्फ एक पूर्व खिलाड़ी का निधन नहीं, बल्कि उस पीढ़ी की स्मृति का क्षण है जिसने क्रिकेट को कला, साहस और पूर्ण कौशल का खेल बनाकर दिखाया।
अब सोबर्स के परिवार, क्रिकेट वेस्ट इंडीज और बारबाडोस सरकार की ओर से अंतिम संस्कार या सार्वजनिक श्रद्धांजलि कार्यक्रमों की जानकारी अपेक्षित है, हालांकि अभी तक ऐसे किसी कार्यक्रम की आधिकारिक घोषणा सामने नहीं आई है।



