नई दिल्ली: मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल यानी भारत की पहली बुलेट ट्रेन परियोजना पर जापान के पूर्व न्याय मंत्री Hideki Makihara की तीखी टिप्पणी के बाद भारत सरकार ने शुक्रवार, 17 जुलाई 2026 को जवाब दिया। विदेश मंत्रालय ने उनके आरोपों को “व्यक्तिगत राय” बताया और कहा कि यह तथ्यों से काफी अलग है। मंत्रालय के प्रवक्ता Randhir Jaiswal ने मीडिया ब्रीफिंग में कहा कि मुंबई-अहमदाबाद HSR पर भारत-जापान चर्चा अच्छी तरह आगे बढ़ रही है।
Hindustan Times के अनुसार Jaiswal ने कहा, “We have seen the post. This is an individual opinion and is at considerable variance with facts. India-Japan discussions on Mumbai-Ahmedabad HSR are progressing well.” यह बयान उस समय आया जब Makihara ने सोशल मीडिया पोस्ट में आरोप लगाया कि भारत की तरफ से परियोजना में वादे पूरे नहीं किए गए और देरी की जिम्मेदारी भारतीय पक्ष पर है।
Makihara जापान की सत्तारूढ़ Liberal Democratic Party से जुड़े नेता हैं और वे पहले न्याय मंत्री रह चुके हैं। ThePrint की रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने बुधवार, 15 जुलाई 2026 को X पर लिखे पोस्ट में भारत-जापान Shinkansen परियोजना में देरी को लेकर भारतीय पक्ष की आलोचना की। उन्होंने यह भी दावा किया कि वार्ताओं में भारत अपना हित अंत तक आगे रखता रहा। भारतीय पक्ष ने इन आरोपों को आधिकारिक रूप से स्वीकार नहीं किया है।
परियोजना क्यों संवेदनशील है
मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल भारत-जापान बुनियादी ढांचा साझेदारी की सबसे बड़ी प्रतीक परियोजनाओं में है। National High Speed Rail Corporation Limited के अनुसार यह 508 किलोमीटर लंबा कॉरिडोर महाराष्ट्र, गुजरात और दादरा एवं नगर हवेली से होकर गुजरेगा। इसमें 12 स्टेशन प्रस्तावित हैं और परिचालन गति 320 किलोमीटर प्रति घंटा रखी गई है। सीमित ठहराव के साथ मुंबई से अहमदाबाद की यात्रा करीब 2 घंटे 7 मिनट में पूरी होने का अनुमान है।
NHSRCL के मुताबिक परियोजना की अनुमानित लागत 1,08,000 करोड़ रुपये है और इसका बड़ा हिस्सा Japan International Cooperation Agency यानी JICA की ODA loan सहायता से आना है। आधिकारिक परियोजना विवरण में कहा गया है कि कुल लागत का करीब 81 प्रतिशत हिस्सा जापान के जरिए वित्तपोषित होगा। इसी वजह से जापान की तकनीक, वित्त और समयसीमा पर कोई भी सार्वजनिक विवाद दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी के संदर्भ में भी देखा जाता है।
देरी पर सरकारी रिकॉर्ड क्या कहता है
रेल मंत्रालय की 11 फरवरी 2026 की PIB जानकारी में कहा गया था कि परियोजना के लिए 1389.5 हेक्टेयर पूरी जमीन अधिग्रहीत हो चुकी है, सभी वैधानिक मंजूरियां मिल चुकी हैं और 1651 utilities shift की जा चुकी हैं। उसी जवाब में मंत्रालय ने माना था कि महाराष्ट्र में जमीन अधिग्रहण की देरी ने 2021 तक परियोजना को प्रभावित किया, जबकि 2022 में महाराष्ट्र में अधिग्रहण ने रफ्तार पकड़ी।
PIB के इसी अपडेट में परियोजना को “complex and technology intensive” बताया गया था और कहा गया था कि सुरक्षा तथा रखरखाव प्रोटोकॉल को देखते हुए इसे जापानी रेलवे के सहयोग से भारतीय जरूरतों और जलवायु स्थितियों के अनुरूप डिजाइन किया गया है। यानी आधिकारिक रिकॉर्ड परियोजना में जापानी सहयोग को स्वीकार करता है, लेकिन देरी के लिए केवल एक पक्ष को जिम्मेदार नहीं ठहराता।
अब अगला लक्ष्य क्या है
आकाशवाणी News On AIR की 4 जुलाई 2026 की रिपोर्ट के अनुसार रेल मंत्री Ashwini Vaishnaw ने अहमदाबाद में समीक्षा के बाद कहा था कि पूरा अहमदाबाद-मुंबई हाई स्पीड रेल कॉरिडोर 2029 के अंत तक पूरा होने की उम्मीद है। उन्होंने यह भी कहा था कि गुजरात खंड में करीब 80 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है और पहला परिचालन खंड Surat-Bilimora के बीच अगले साल शुरू करने की योजना है।
Times of India की 17 जुलाई 2026 की रिपोर्ट में सरकारी सूत्रों के हवाले से कहा गया कि भारत और जापान परियोजना पर बातचीत आगे बढ़ा रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक शुरुआती परिचालन भारतीय हाई-स्पीड ट्रेन से शुरू करने और जापान की अगली पीढ़ी की E10 Shinkansen ट्रेनें 2030 के बाद लाने की योजना पर चर्चा है। यह संकेत देता है कि ट्रेनसेट, सिग्नलिंग और तकनीकी compatibility पर अंतिम व्यवस्था अभी भी परियोजना की अहम कड़ी बनी हुई है।
यह विवाद ऐसे समय उठा है जब रेलवे अपनी नई तकनीकी परियोजनाओं को तेज करने की कोशिश कर रहा है। हाल में देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को लेकर भी सरकार ने रेल आधुनिकीकरण का संदेश दिया है। लेकिन बुलेट ट्रेन परियोजना का पैमाना अलग है: इसमें जापानी वित्तीय सहायता, अत्याधुनिक हाई-स्पीड तकनीक और दो राज्यों में फैला जटिल निर्माण शामिल है।
फिलहाल पुष्टि यही है कि जापान के पूर्व मंत्री ने देरी को लेकर भारत पर आरोप लगाए हैं, और भारत के विदेश मंत्रालय ने उन आरोपों को तथ्यों से अलग बताते हुए खारिज किया है। आगे नजर इस पर रहेगी कि Surat-Bilimora खंड 2027 में शुरू होता है या नहीं, और भारत-जापान बातचीत ट्रेनसेट तथा सिग्नलिंग से जुड़े मुद्दों को किस तरह अंतिम रूप देती है।



