कीव, 17 जुलाई 2026: यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की ने पूर्व गृह मंत्री इहोर क्लीमेंको को राष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा परिषद (NSDC) का सचिव बनाने की पेशकश की है। यह कदम रक्षा मंत्री पद से मिखाइलो फेदोरोव को हटाए जाने के बाद पैदा हुए राजनीतिक विवाद के बीच आया है, जब कीव में राष्ट्रपति कार्यालय के बाहर और कई अन्य शहरों में प्रदर्शन शुक्रवार को दूसरे दिन भी जारी रहे।
ज़ेलेंस्की ने अपने सोशल मीडिया बयान में कहा कि क्लीमेंको सुरक्षा और रक्षा क्षेत्र में काम जारी रखेंगे और उनकी नियुक्ति से जुड़ा आदेश तैयार किया जा रहा है। यूक्रेनी मीडिया ने यह बयान 17 जुलाई को 14:23 कीव समय पर रिपोर्ट किया। रॉयटर्स ने 13:22 UTC पर प्रकाशित अपनी रिपोर्ट में लिखा कि क्लीमेंको को सुरक्षा और रक्षा क्षेत्र के सभी हिस्सों, खासकर रक्षा उत्पादन के समन्वय की जिम्मेदारी दी जाएगी।
यह बदलाव इसलिए अहम है क्योंकि क्लीमेंको का नाम पहले रक्षा मंत्री पद के संभावित विकल्प के तौर पर चल रहा था। लेकिन गुरुवार देर रात ज़ेलेंस्की ने कार्यवाहक SBU प्रमुख मेजर जनरल येवहेनी खमारा को रक्षा मंत्री के रूप में आगे बढ़ाने की बात कही। AP के अनुसार, खमारा को औपचारिक रक्षा मंत्री नियुक्त करने के लिए संसद की मंजूरी जरूरी होगी और यूक्रेनी कानून के तहत रक्षा मंत्री नागरिक होना चाहिए; इसलिए सक्रिय सैन्य या सुरक्षा सेवा पद से अलग होने जैसी प्रक्रियाएं भी रास्ते में आ सकती हैं। संसद का अगला सत्र मध्य अगस्त तक टल सकता है।
फेदोरोव की बर्खास्तगी से क्यों भड़का विवाद
मिखाइलो फेदोरोव सिर्फ छह महीने रक्षा मंत्री रहे, लेकिन उन्हें यूक्रेन के ड्रोन युद्ध, रक्षा खरीद सुधार और सैन्य तंत्र में तकनीकी बदलावों से जोड़ा जाता रहा है। उनके समर्थकों का कहना है कि रूस के खिलाफ लंबी लड़ाई में ऐसे सुधारों ने यूक्रेन की क्षमता बढ़ाई। ज़ेलेंस्की सरकार ने उन्हें हटाने को व्यापक सरकारी फेरबदल का हिस्सा बताया, लेकिन फैसले ने युद्धकाल में दुर्लभ सार्वजनिक नाराजगी को जन्म दिया।
विवाद की एक पृष्ठभूमि फेदोरोव और यूक्रेनी सैन्य कमांडर जनरल ओलेक्सांद्र सिरस्की के बीच तनाव भी है। AP ने ज़ेलेंस्की के हवाले से बताया कि दोनों के रिश्ते इस स्तर तक बिगड़ गए थे कि फेदोरोव का पद पर बने रहना मुश्किल हो गया। फेदोरोव ने सार्वजनिक रूप से सिरस्की पर अपने सुधारों में बाधा डालने का आरोप लगाया, जबकि सेना नेतृत्व ने युद्ध प्रयास पर ध्यान केंद्रित रखने की बात कही।
रॉयटर्स के अनुसार, शुक्रवार को प्रदर्शनकारी फिर राष्ट्रपति कार्यालय के पास जुटे और फेदोरोव को वापस लाने की मांग की। गुरुवार को भी कीव और अन्य शहरों में लोग सड़कों पर उतरे थे। यूक्रेन में युद्धकालीन माहौल में इस तरह का खुला विरोध राजनीतिक रूप से असामान्य माना जाता है, खासकर तब जब मोर्चे पर रूस का दबाव और शहरों पर हवाई हमले जारी हैं।
नई सुरक्षा संरचना का संकेत
क्लीमेंको 2023 से गृह मंत्रालय का नेतृत्व कर रहे थे और युद्ध के दौरान पुलिस, आपात प्रतिक्रिया, आंतरिक सुरक्षा और नागरिक निकासी जैसे क्षेत्रों से जुड़े रहे। NSDC सचिव के रूप में उनका संभावित काम सिर्फ सलाहकार भूमिका तक सीमित नहीं रहेगा; परिषद राष्ट्रपति के तहत राष्ट्रीय सुरक्षा, रक्षा निर्णयों और युद्धकालीन प्राथमिकताओं के समन्वय का केंद्रीय मंच है।
मौजूदा NSDC सचिव रुस्तेम उमेरोव का अगला पद अभी स्पष्ट नहीं है। उमेरोव पहले रक्षा मंत्री रह चुके हैं और रूस के साथ अमेरिकी समर्थन वाली शांति बातचीत में यूक्रेन के प्रमुख वार्ताकारों में शामिल रहे हैं। इसलिए क्लीमेंको की नियुक्ति केवल एक प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि सुरक्षा नीति, रक्षा उत्पादन और युद्ध प्रबंधन की कमान में नई लाइन तय करने वाला फैसला हो सकता है।
इसी बीच यूक्रेन पर रूसी हमले भी जारी हैं। AP के अनुसार, 17 जुलाई की रात रूस के हमलों में कम से कम चार नागरिक मारे गए और 20 घायल हुए। ओडेसा में दो और जापोरिझझिया क्षेत्र में दो मौतों की पुष्टि की गई, जबकि खारकीव और अन्य क्षेत्रों से भी घायलों की खबर आई। इससे पहले यूक्रेन में रूसी हमलों और बंदरगाहों पर नुकसान को लेकर भी तनाव बढ़ा था।
आगे क्या देखना होगा
अब तीन चीजें निर्णायक होंगी। पहली, क्लीमेंको की नियुक्ति का औपचारिक आदेश कब जारी होता है और उमेरोव को कौन सी भूमिका मिलती है। दूसरी, खमारा की रक्षा मंत्री पद पर औपचारिक नियुक्ति संसद और कानूनी प्रक्रिया से कितनी तेजी से गुजरती है। तीसरी, फेदोरोव समर्थक विरोध कितना लंबा चलता है और क्या ज़ेलेंस्की उस दबाव में कोई राजनीतिक समायोजन करते हैं।
ज़ेलेंस्की के लिए यह संकट ऐसे समय आया है जब नई सरकार को सर्दियों से पहले ऊर्जा ढांचे की सुरक्षा, सैन्य भर्ती की दिक्कतों, एयर डिफेंस की कमी और रक्षा उत्पादन बढ़ाने जैसे मोर्चों पर तेजी से काम करना है। इसलिए क्लीमेंको की नई भूमिका का असली परीक्षण नियुक्ति के बाद प्रशासनिक नियंत्रण में नहीं, बल्कि युद्धकालीन फैसलों को तेजी से लागू कराने में होगा।



