गुरुवार, 15 अक्टूबर 2026
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सोनम वांगचुक अनशन: सेहत पर चिंता, दिल्ली हाईकोर्ट ने रोज मेडिकल निगरानी का आदेश दिया

NEET में कथित अनियमितताओं के खिलाफ जंतर-मंतर पर अनशन कर रहे सोनम वांगचुक की सेहत को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने 16 जुलाई 2026 को सरकार से रोज मेडिकल निगरानी और जरूरत पड़ने पर हस्तक्षेप सुनिश्चित करने को कहा।

जंतर-मंतर पर अनशन और मेडिकल निगरानी को दर्शाता प्रतिनिधि संपादकीय दृश्य।
सोनम वांगचुक के अनशन और दिल्ली हाईकोर्ट के मेडिकल निगरानी आदेश पर आधारित प्रतिनिधि संपादकीय दृश्य।

नई दिल्ली: NEET परीक्षा में कथित अनियमितताओं के खिलाफ जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन अनशन कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की सेहत को लेकर 16 जुलाई 2026 को दिल्ली हाईकोर्ट ने सरकार को रोज मेडिकल निगरानी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि उनकी हालत सरकारी डॉक्टरों से नियमित रूप से जांची जाए और डॉक्टरों की राय के आधार पर जरूरत पड़ने पर तुरंत मेडिकल हस्तक्षेप किया जाए।

यह आदेश ऐसे समय आया है जब वांगचुक का अनशन 19वें दिन में पहुंच चुका है और मेडिकल अपडेट के मुताबिक उनका वजन 9 किलो से ज्यादा घट चुका है। डॉक्टरों के अनुसार वे फिलहाल मानसिक रूप से सतर्क और स्थिर हैं, लेकिन लंबे अनशन का अगला चरण चिंताजनक हो सकता है, खासकर अगर शरीर में ऊर्जा की कमी अंगों पर असर डालने लगे।

हाईकोर्ट ने क्या कहा

चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की पीठ ने वकील राकेश कुमार सैनी की एक जनहित याचिका पर सुनवाई की, जिसमें वांगचुक को अस्पताल ले जाने, इलाज देने और जरूरत पड़ने पर फोर्स-फीडिंग तक की मांग की गई थी।

सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने केंद्र और दिल्ली सरकार की ओर से अदालत को बताया कि वांगचुक की नियमित जांच पर कोई आपत्ति नहीं है और उनकी सेहत की निगरानी पहले से की जा रही है। इस पर अदालत ने कहा कि जीवन बचाने के लिए सभी जरूरी मेडिकल प्रयास किए जाने चाहिए, और याचिका का निपटारा करते हुए रोजाना क्लिनिकल निगरानी तथा जरूरत के मुताबिक इलाज का निर्देश दिया।

सेहत पर डॉक्टरों की चेतावनी

डॉ. सतीश लांबा के हवाले से आई मेडिकल जानकारी के मुताबिक, अनशन के 19वें दिन वांगचुक का कुल वजन 9 किलो से अधिक घट चुका है। उनके ब्लड शुगर, पल्स और ब्लड प्रेशर के आंकड़े दर्ज किए गए हैं, और हाइड्रेशन को फिलहाल ठीक बताया गया है। हालांकि डॉक्टरों ने लंबे उपवास से मांसपेशियों की कमजोरी और अंगों पर पड़ने वाले संभावित दबाव को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी है।

वांगचुक ने खुद बुधवार देर रात एक वीडियो संदेश में समर्थकों से अपील की कि वे उन्हें अनशन तोड़ने के लिए कहने के बजाय 20 जुलाई को प्रस्तावित संसद मार्च में शामिल हों। उन्होंने बताया कि अब तक की मेडिकल जांचों में तत्काल खतरे जैसी कोई स्थिति नहीं दिखी है, हालांकि उन्होंने कमजोरी और मांसपेशियों के कमजोर पड़ने की बात स्वीकार की।

अनशन की पृष्ठभूमि

वांगचुक ने 28 जून 2026 को जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन अनशन शुरू किया था। वे Cockroach Janta Party के नेतृत्व में चल रहे युवाओं के आंदोलन के साथ एकजुटता जता रहे हैं। आंदोलनकारी NEET परीक्षा में कथित पेपर लीक और अनियमितताओं को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और परीक्षा व्यवस्था में जवाबदेही की मांग कर रहे हैं।

16 जुलाई को आंदोलनकारियों ने एक दिन के सामूहिक उपवास का आह्वान किया। Cockroach Janta Party ने 20 जुलाई 2026 को “चलो संसद” मार्च की घोषणा की है, और वांगचुक ने समर्थकों, छात्रों तथा शिक्षण संस्थानों से इसमें शामिल होकर मुद्दे को संसद तक पहुंचाने की अपील की है।

अब आगे क्या

हाईकोर्ट के आदेश के बाद सरकारी डॉक्टरों की भूमिका निर्णायक हो गई है — अगर जांच में सेहत बिगड़ने के संकेत मिलते हैं, तो प्रशासन को डॉक्टरों की सलाह के अनुसार हस्तक्षेप करना होगा। वहीं वांगचुक ने फिलहाल अनशन जारी रखने का संकेत दिया है, इसलिए आने वाले दिनों में उनकी मेडिकल स्थिति और 20 जुलाई के संसद मार्च की तैयारी, दोनों पर नजर रहेगी।

यह मामला अब सिर्फ NEET से जुड़ी कथित गड़बड़ियों पर राजनीतिक विरोध भर नहीं रह गया है। अदालत के हस्तक्षेप ने इसे एक नागरिक के जीवन, शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार और राज्य की स्वास्थ्य संबंधी जिम्मेदारी के बीच संतुलन के सवाल में बदल दिया है।

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