अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय (ICC) के निलंबित मुख्य अभियोजक करीम खान पर यौन दुराचार के आरोप लगाने वाली जूनियर वकील पहली बार सार्वजनिक रूप से सामने आई हैं। CNN को 16 जुलाई 2026 को दिए इंटरव्यू में मलेशिया मूल की वकील, जिन्हें रिपोर्ट में केवल Sarah के रूप में पहचाना गया है, ने आरोप दोहराया कि खान ने उनके साथ गैर-सहमति वाला यौन संपर्क किया। खान, 56, इन आरोपों से लगातार इनकार करते रहे हैं।
यह बयान ICC के लिए बेहद संवेदनशील समय पर आया है। अदालत के 125 सदस्य देश 24 जुलाई 2026 को न्यूयॉर्क में विशेष सत्र में खान के भविष्य पर फैसला करने वाले हैं। सदस्य देशों के सामने सवाल यह होगा कि खान का निलंबन बरकरार रहे या उन्हें पद से हटाया जाए। TNX ने इससे पहले रिपोर्ट किया था कि ICC की मेजबानी करने वाला नीदरलैंड खान को हटाने के पक्ष में वोट देने की तैयारी में है।
इंटरव्यू में क्या नया सामने आया
CNN के अनुसार Sarah ICC में 2017 से काम कर रही हैं और फरवरी 2023 से खान की प्रत्यक्ष सहायक के रूप में काम करने लगी थीं। उन्होंने इंटरव्यू में दावा किया कि खान का कथित व्यवहार धीरे-धीरे बढ़ा और इसमें छूना, पकड़ना और गैर-सहमति वाले शारीरिक संपर्क शामिल थे। Reuters की 16 जुलाई की रिपोर्ट के मुताबिक Sarah ने CNN से कहा कि सत्ता के इतने बड़े अंतर में सहमति की बात नहीं हो सकती।
Sarah अब भी ICC में कार्यरत हैं। CNN ने उनका पूरा नाम उनके अनुरोध पर प्रकाशित नहीं किया। रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने यह भी कहा कि आरोप सामने लाने से उनकी नौकरी, वीजा और भविष्य के करियर पर असर पड़ने का डर था। उन्होंने उन ऑनलाइन दावों को भी खारिज किया जिनमें उन्हें इजराइल की खुफिया एजेंसी Mossad से जोड़ने की कोशिश की गई थी। Sarah ने कहा कि ICC में काम करने के लिए उन्हें उच्च स्तर की सुरक्षा जांच से गुजरना पड़ा था।
खान और उनके वकीलों का रुख
करीम खान ने किसी भी गलत आचरण से इनकार किया है। CNN के सवालों पर खान की प्रमुख वकील Sareta Ashraph ने कहा कि खान किसी भी तरह के यौन संपर्क या संबंध, चाहे सहमति वाला हो या गैर-सहमति वाला, से इनकार करते हैं। खान की टीम पहले भी कह चुकी है कि उनके खिलाफ प्रक्रिया अनुचित और साक्ष्य से असमर्थित है।
मामला केवल एक टीवी इंटरव्यू तक सीमित नहीं है। CNN ने संयुक्त राष्ट्र के Office of Internal Oversight Services (OIOS) की एक गोपनीय रिपोर्ट का हवाला दिया, जिसमें Sarah के आरोपों के लिए तथ्यात्मक आधार मिलने की बात कही गई। लेकिन मार्च 2026 में ICC की ओर से गठित न्यायिक विशेषज्ञों के पैनल ने अलग निष्कर्ष में कहा था कि उपलब्ध सामग्री ‘beyond reasonable doubt’ के मानक पर दुराचार साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं है। यही अंतर अब खान के बचाव और उन्हें हटाने की मांग, दोनों के केंद्र में है।
24 जुलाई की वोटिंग क्यों अहम है
ICC की Assembly of States Parties ही खान को पद से हटाने का अधिकार रखती है। अदालत की निगरानी व्यवस्था ने जून 2026 में खान को निलंबित किया था और मामला सदस्य देशों के सामने भेजा गया। Reuters ने जून में उन दस्तावेजों का हवाला दिया था जिनके अनुसार ICC की निगरानी संस्था के राजनयिकों ने माना कि खान का एक जूनियर स्टाफ सदस्य के साथ अनुचित यौन संबंध था और उन्हें हटाया जाना चाहिए।
Reuters की 16 जुलाई की रिपोर्ट के अनुसार डच सरकार ने अपने संसद को भेजे पत्र में कहा कि वह निगरानी संस्था की सिफारिश का पालन करेगी। नीदरलैंड का रुख प्रतीकात्मक रूप से अहम है, क्योंकि ICC का मुख्यालय द हेग में है। इससे हटाने के प्रस्ताव को राजनीतिक गति मिल सकती है, हालांकि अंतिम निर्णय 125 सदस्य देशों के वोट से ही होगा।
यह संकट उस समय आया है जब ICC पहले से अमेरिकी दबाव और प्रतिबंधों का सामना कर रहा है। खान के कार्यालय ने 2024 में गाजा युद्ध से जुड़े मामलों में इजराइली अधिकारियों और हमास नेताओं के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट मांगे थे। खान के समर्थकों का कहना है कि आरोपों को राजनीतिक संदर्भ में देखा जाना चाहिए, जबकि आरोप लगाने वाली वकील ने CNN से कहा कि इस तरह का जोड़ असल शिकायत से ध्यान भटकाता है।
फिलहाल पुष्टि की गई बात यह है कि आरोप लगाने वाली वकील पहली बार सार्वजनिक रूप से सामने आई हैं, खान आरोपों से इनकार कर रहे हैं, और ICC सदस्य देशों की निर्णायक वोटिंग 24 जुलाई 2026 को होनी है। आरोपों की कानूनी और प्रशासनिक परिणति उसी वोट और आगे की अनुशासनात्मक प्रक्रिया से तय होगी।



