शनिवार, 17 अक्टूबर 2026
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शिवपुरी के नरवर किले से 400 साल पुरानी ऐतिहासिक तोप चोरी

मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में नरवर किले से करीब 400 साल पुरानी ऐतिहासिक तोप चोरी हो गई। पुलिस ने जांच शुरू कर दी है और तस्करी गिरोह की भूमिका से भी इनकार नहीं किया जा रहा।

नरवर किले में चोरी हुई तोप को दर्शाने वाला प्रतिनिधि संपादकीय दृश्य
नरवर किले से ऐतिहासिक तोप चोरी के मामले पर प्रतिनिधि संपादकीय दृश्य।

मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के ऐतिहासिक नरवर किले से 15 और 16 जुलाई 2026 की दरम्यानी रात एक करीब 400 साल पुरानी तोप चोरी हो गई। शुरुआती जांच में सामने आया है कि आरोपी किले के पिछले हिस्से से वाहन लेकर पहुंचे और वहां रखी तोप उठाकर फरार हो गए। इस वारदात ने एक संरक्षित ऐतिहासिक परिसर की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

शुक्रवार, 17 जुलाई 2026 को सामने आई जानकारी के अनुसार किले में रखी 14 ऐतिहासिक तोपों में से अब सिर्फ 13 बची हैं। पुलिस और पुरातत्व विभाग से जुड़े अधिकारियों ने मामले की जांच शुरू कर दी है।

वारदात कैसे हुई

PTI की रिपोर्ट के मुताबिक करैरा के SDOP प्रशांत शर्मा ने बताया कि सूचना मिलते ही पुलिस ने मौके का निरीक्षण किया। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार कुछ लोग वाहन से किले के पीछे के हिस्से तक पहुंचे और तोप लेकर निकल गए। पुलिस अब आसपास के CCTV फुटेज, संभावित रास्तों और तकनीकी साक्ष्यों की जांच कर रही है।

स्थानीय और राष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों में आरोपियों की संख्या 25 से 30 के बीच बताई गई है। कुछ रिपोर्टों के मुताबिक बदमाश हथियारबंद थे और उन्होंने ड्यूटी पर मौजूद सुरक्षा कर्मियों को धमकाया। TV9 हिंदी की रिपोर्ट में सुरक्षा कर्मी बाल किशन के हवाले से कहा गया है कि उनके पास सुरक्षा के नाम पर केवल लाठी थी, और रात में पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था भी नहीं थी।

Times of India की रिपोर्ट में ग्वालियर रेंज IG अरविंद सक्सेना के हवाले से बताया गया कि किले के अंदर कोई CCTV कैमरा नहीं लगा है, इसलिए जांच दल किले तक आने-जाने वाली सड़कों पर लगे कैमरों के फुटेज खंगाल रहा है। इसी रिपोर्ट के अनुसार पुलिस किले के पुराने रिकॉर्ड और पहले हुई चोरी की घटनाओं की भी पड़ताल कर रही है।

क्या पहले भी एक कोशिश हुई थी?

कई रिपोर्टों में दावा किया गया है कि चोरी हुई तोप को कुछ दिन पहले भी उसकी जगह से हटाने की कोशिश हुई थी, लेकिन तब उसे सुरक्षित स्थान पर नहीं रखा गया। Free Press Journal और TV9 हिंदी की रिपोर्टों के मुताबिक 5 जुलाई 2026 के आसपास इसी तोप को ले जाने की कोशिश हुई थी, लेकिन आरोपी उसके भारी वजन के कारण उसे नहीं ले जा सके। बताया जा रहा है कि इसके बाद वे 15-16 जुलाई की रात लोडिंग वाहन या भारी उपकरण के साथ लौटे।

तोप के सही वजन को लेकर रिपोर्टों में अंतर है — कुछ स्थानीय रिपोर्टों ने इसे 3,000 किलो, तो कुछ ने 3,500 किलो तक बताया है। उपलब्ध पुलिस और PTI रिपोर्ट में आधिकारिक वजन स्पष्ट नहीं है, इसलिए फिलहाल इसे कई टन वजनी ऐतिहासिक तोप के रूप में ही पुष्ट माना जा सकता है।

यह चोरी क्यों महत्वपूर्ण है

नरवर किला शिवपुरी से करीब 40 किलोमीटर दूर एक पहाड़ी पर स्थित मध्यकालीन किला है। मध्य प्रदेश पर्यटन विभाग के अनुसार इसे 10वीं सदी में कछवाहा राजपूतों से जोड़ा जाता है और यह राजपूताना शैली की स्थापत्य विशेषताओं के लिए जाना जाता है। स्थानीय परंपराओं में इस किले का संबंध राजा नल-दमयंती की कथा से भी जोड़ा जाता रहा है।

चोरी हुई तोप को सिंधिया या मध्यकालीन सैन्य विरासत से जुड़ी धरोहर बताया जा रहा है। कुछ रिपोर्टों में इसके धातु मिश्रण, शाही प्रतीकों और फारसी-देवनागरी लेखन का उल्लेख है, लेकिन इन विवरणों की आधिकारिक तकनीकी पुष्टि अभी सार्वजनिक नहीं हुई है। फिर भी, 14 तोपों में से एक का गायब होना अपने-आप में धरोहर संरक्षण के लिए एक बड़ा नुकसान है।

यह घटना इसलिए भी संवेदनशील है क्योंकि नरवर किले से पहले भी तोप चोरी की घटना दर्ज हो चुकी है। Times of India ने 2007 में हुई एक पुरानी चोरी का संदर्भ दिया है, जब किले से मुगलकालीन तोप गायब हुई थी। The New Indian Express की जून 2026 की रिपोर्ट के अनुसार देश में दशकों से दर्ज पुरावशेष चोरी के मामलों में मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश का बड़ा हिस्सा रहा है।

अब आगे क्या

पुलिस ने मामले की सभी कोणों से जांच शुरू कर दी है और अंतरराज्यीय या अंतरराष्ट्रीय एंटीक तस्करी गिरोह की भूमिका से इनकार नहीं किया है। जांच का अगला फोकस वाहन के रूट, आसपास के कैमरों, किले की सुरक्षा व्यवस्था और तोप हटाने में इस्तेमाल हुए उपकरणों पर रहेगा।

राज्य पुरातत्व विभाग के अधिकारियों ने भी सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की बात कही है। अभी तक किसी गिरफ्तारी या तोप की बरामदगी की पुष्टि नहीं हुई है। जब तक बरामदगी नहीं होती, यह मामला मध्य प्रदेश की विरासत सुरक्षा व्यवस्था के लिए एक बड़ा चेतावनी संकेत बना रहेगा।

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