ISRO में हाल के महीनों में 100 से ज्यादा वैज्ञानिकों और तकनीकी कर्मचारियों के इस्तीफों की रिपोर्ट के बाद Department of Space (DoS) ने एग्जिट नियम सख्त कर दिए हैं। 14 जुलाई 2026 को जारी एक आंतरिक मेमो के तहत अब गगनयान और अन्य राष्ट्रीय महत्व के मिशनों से जुड़े Group A वैज्ञानिक-तकनीकी कर्मचारियों के इस्तीफे या स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) के अनुरोध केंद्रों पर सामान्य प्रक्रिया से स्वीकार नहीं होंगे। ऐसे मामले अब संबंधित केंद्र निदेशक की स्पष्ट सिफारिश के साथ अंतिम फैसले के लिए DoS को भेजने होंगे।
यह कदम ऐसे समय आया है जब ISRO गगनयान मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम, भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन, अगली पीढ़ी के लॉन्च व्हीकल और उन्नत उपग्रह कार्यक्रमों जैसे कई बड़े मिशनों पर एक साथ काम कर रहा है। DoS ने इस्तीफों की आधिकारिक संख्या सार्वजनिक नहीं की है, लेकिन कई रिपोर्टों में ISRO के सूत्रों के हवाले से यह आंकड़ा 100 से 120 के बीच बताया गया है।
क्या बदला है?
नवंबर 2020 के प्रशासनिक बदलाव के बाद ISRO केंद्रों के निदेशक और यूनिट प्रमुख Scientist/Engineer-SG स्तर तक के Group A कर्मचारियों के इस्तीफे या VRS खुद मंजूर कर सकते थे। अब गगनयान और अन्य अहम प्रोजेक्ट से जुड़े मामलों में यह अधिकार प्रभावी रूप से DoS के पास चला गया है। रिपोर्टों के मुताबिक मेमो में कहा गया है कि इन मिशनों से जुड़े कर्मियों की ओर से इस्तीफे और VRS के अनुरोधों में तेजी आई है, जिससे राष्ट्रीय महत्व की परियोजनाओं के क्रियान्वयन पर असर पड़ने की आशंका जताई गई है। इसी आधार पर केंद्रों से कहा गया है कि ऐसे अनुरोधों को नियमित प्रशासनिक कार्रवाई की तरह न निपटाया जाए।
सबसे ज्यादा इस्तीफे कहां से
Times of India ने ISRO सूत्रों के हवाले से बताया कि UR Rao Satellite Centre (URSC), बेंगलुरु से करीब 80 और Vikram Sarabhai Space Centre (VSSC), तिरुवनंतपुरम से कम से कम 20 लोग जा चुके हैं। इनमें LVM-3 के पूर्व प्रोजेक्ट डायरेक्टर विक्टर जोसेफ टी. और चंद्रयान-3 से जुड़े सिमुलेशन प्रोजेक्ट मैनेजर आदित्य रल्लापल्ली जैसे नाम भी शामिल हैं। NDTV की रिपोर्ट के अनुसार भी ज्यादातर इस्तीफे URSC और VSSC से हुए हैं; विक्टर जोसेफ ने फरवरी 2026 में संस्थान छोड़ा था।
यहां एक स्पष्टता जरूरी है — DoS ने अभी तक इस्तीफों की संख्या पर आधिकारिक बयान नहीं दिया है। इसलिए फिलहाल पुष्टि योग्य तथ्य यही हैं: 14 जुलाई का मेमो सामने आया है, एग्जिट मंजूरी की प्रक्रिया कड़ी हुई है, और 100 से ज्यादा इस्तीफों का दावा कई स्वतंत्र रिपोर्टों में ISRO सूत्रों के हवाले से किया गया है।
सरकार और ISRO का रुख
केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने 16 जुलाई 2026 को इन इस्तीफों को संस्थागत संकट मानने से इनकार किया। India Today के मुताबिक उन्होंने इसे प्रशासनिक बदलाव बताया, जिसका मकसद फैसले अधिक परिपक्व स्तर पर लेना है। उन्होंने ISRO में आवाजाही को किसी भी बड़े वैज्ञानिक संगठन की सामान्य प्रक्रिया बताते हुए कहा, “Many have gone, many have come.”
ISRO अध्यक्ष वी. नारायणन ने भी Times of India से कहा कि लोगों का जाना हर संगठन का हिस्सा है, लेकिन मेमो का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि महत्वपूर्ण परियोजनाएं अचानक प्रभावित न हों। उनके अनुसार किसी के जाने पर जिम्मेदारी किसी और को सौंपी जाएगी और संगठन स्थिति को संभाल रहा है।
यह मुद्दा अहम क्यों है
ISRO का कुल कार्यबल बड़ा है, इसलिए 100-120 की संख्या संगठन के अनुपात में छोटी लग सकती है। लेकिन चिंता संख्या से ज्यादा कौशल और मिशन की स्थिति को लेकर है। गगनयान जैसे मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम में लॉन्च व्हीकल, क्रू मॉड्यूल, एस्केप सिस्टम, सिमुलेशन, सेफ्टी वैलिडेशन और मिशन ऑपरेशन जैसे क्षेत्रों में लंबे अनुभव की जरूरत होती है। प्रोजेक्ट के बीच अनुभवी वैज्ञानिकों का जाना केवल खाली पद भरने का मामला नहीं रहता; इससे ज्ञान-हस्तांतरण और जिम्मेदारियों के पुनर्वितरण की चुनौती भी खड़ी होती है।
यह पृष्ठभूमि इसलिए भी अहम है क्योंकि फरवरी 2026 में संसद में दी गई सरकारी जानकारी के अनुसार ISRO में उस समय 2,613 पद रिक्त थे और 1,449 पदों पर भर्ती प्रक्रिया चल रही थी। सरकार ने यह भी बताया था कि यह भर्ती प्रक्रिया अक्टूबर 2026 तक पूरी होने की उम्मीद है — यानी संस्थान पहले से ही भर्ती और पद-भराई के दबाव में है।
आगे नजर दो बातों पर रहेगी: DoS कितने मामलों में इस्तीफा या VRS रोकता है, और क्या ISRO महत्वपूर्ण मिशनों में तकनीकी निरंतरता बनाए रखने के लिए तेज भर्ती, अंदरूनी पुनर्नियुक्ति और ज्ञान-हस्तांतरण की अलग व्यवस्था करता है। फिलहाल केंद्र का संदेश साफ है — गगनयान और राष्ट्रीय महत्व के प्रोजेक्ट से जुड़े वैज्ञानिकों की विदाई अब सिर्फ प्रशासनिक फैसला नहीं, बल्कि मिशन-जोखिम का सवाल भी मानी जाएगी।



