नई दिल्ली, 18 जुलाई 2026, 00:30 IST: ईरान और अमेरिका के बीच टकराव 17 जुलाई 2026 को और गहरा गया। अमेरिकी हमलों ने दक्षिणी ईरान में पुलों, ऊर्जा ढांचे और चाबहार पोर्ट से जुड़े एक टावर को निशाना बनाया, तो जवाब में ईरान ने कतर, कुवैत, बहरीन और आसपास के इलाकों की ओर मिसाइल व ड्रोन हमले किए। संघर्ष अब सिर्फ सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं रहा — हॉर्मुज जलडमरूमध्य, बंदरगाह, बिजली-पानी की व्यवस्था और तेल आपूर्ति भी सीधे इसकी चपेट में आ गए हैं।
एसोसिएटेड प्रेस के मुताबिक अमेरिकी सेना ने शुक्रवार तड़के अपनी ताजा कार्रवाई पूरी होने की पुष्टि की। यह ईरान पर लगातार छठी रात हुए अमेरिकी हमलों का दौर था। इनमें होर्मोजगान प्रांत के बंदर खमीर इलाके में सड़क और रेल पुलों को नुकसान पहुंचा। ईरानी सरकारी टीवी के हवाले से कम से कम सात लोगों की मौत की खबर है, जबकि ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रवक्ता के अनुसार हालिया अमेरिकी हमलों में शुक्रवार सुबह तक कुल कम से कम 38 लोग मारे गए और 400 से अधिक घायल हुए। युद्धक्षेत्र की स्थिति के चलते इन आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल सीमित है।
कहां-कहां हुए हमले
रिपोर्टों के मुताबिक अमेरिकी कार्रवाई का बड़ा हिस्सा बंदर अब्बास की ओर जाने वाले परिवहन मार्गों पर केंद्रित रहा। बंदर अब्बास ईरान का सबसे अहम समुद्री और नौसैनिक केंद्र है और हॉर्मुज जलडमरूमध्य के करीब स्थित है। चाबहार पोर्ट पर एक टावर गिरने की भी पुष्टि हुई है। ईरान का दावा है कि यह टावर वाणिज्यिक समुद्री यातायात की निगरानी से जुड़ा था, जबकि अमेरिकी सेंट्रल कमांड इसे रिवोल्यूशनरी गार्ड के समुद्री निगरानी नेटवर्क का हिस्सा बता रहा है।
चाबहार भारत के लिए भी रणनीतिक रूप से अहम है। नई दिल्ली ने शुक्रवार को साफ किया कि भारत-समर्थित शाहिद बेहेश्ती टर्मिनल को कोई नुकसान नहीं पहुंचा। TNX ने इस पर अलग रिपोर्ट में बताया था कि चाबहार में भारत-समर्थित टर्मिनल सुरक्षित है। इसी संघर्ष से जुड़े परमाणु-सुरक्षा पहलू पर पहले बुशेहर परमाणु संयंत्र परिसर में नुकसान के संकेत भी सामने आए थे।
ईरान का जवाब और खाड़ी में बढ़ता जोखिम
अमेरिकी हमलों के जवाब में ईरान ने खाड़ी क्षेत्र के अमेरिका-समर्थित देशों की ओर मिसाइलें दागीं। कतर ने लोगों को आश्रय लेने की चेतावनी दी, जहां गिरते मलबे से एक बच्चे के घायल होने की सूचना है। कुवैत ने बताया कि उसके एक बिजली और जल-अलवणीकरण संयंत्र को नुकसान पहुंचा है — यह गंभीर संकेत है, क्योंकि वहां पीने के पानी का बड़ा हिस्सा इन्हीं संयंत्रों पर निर्भर है। जॉर्डन ने तीन मिसाइलें रोकने का दावा किया, जबकि उत्तरी इराक के कुर्द क्षेत्र में भी धमाकों की खबर आई, हालांकि इनमें से कुछ हमलों की जिम्मेदारी ईरान ने तुरंत नहीं ली।
ब्रिटिश समुद्री सुरक्षा केंद्र UKMTO ने हॉर्मुज से गुजर रहे एक टैंकर को मामूली नुकसान की सूचना दी, हालांकि चालक दल सुरक्षित बताया गया। ईरान ने इस घटना पर तत्काल कोई दावा नहीं किया। इस बीच अमेरिकी बलों ने ईरानी बंदरगाहों पर नौसैनिक नाकेबंदी लागू कराने के लिए कुछ व्यावसायिक जहाजों को मोड़ने, एक जहाज को निष्क्रिय करने और एक अन्य जहाज पर चढ़कर जांच करने की बात कही है।
तेल, शिपिंग और भारत पर असर
हॉर्मुज जलडमरूमध्य से शांतिकाल में दुनिया के तेल और गैस व्यापार का बड़ा हिस्सा गुजरता है। एपी ने MarineTraffic के हवाले से बताया कि गुरुवार, 16 जुलाई को इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों की संख्या तीन सप्ताह के निचले स्तर पर पहुंच गई। शुक्रवार को तेल कीमतें 86 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर चली गईं। भारत के लिए इसका सीधा मतलब है कच्चे तेल, मालभाड़े और बीमा लागत पर बढ़ता दबाव। संकट लंबा खिंचा तो रुपये, ईंधन आयात बिल और ऊर्जा कंपनियों के मुनाफे पर भी असर पड़ सकता है।
कूटनीतिक तस्वीर भी उलझी हुई है। पिछले महीने हुए अस्थायी युद्धविराम की शर्तें लगभग टूट चुकी हैं, हालांकि कतर और पाकिस्तान जैसे मध्यस्थ अब भी कोई रास्ता निकालने की कोशिश में हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी जनता से कहा है कि युद्ध अमेरिका के पक्ष में जा रहा है, लेकिन जमीनी संकेत इसके उलट हैं — हमले बढ़ रहे हैं, जवाबी कार्रवाई क्षेत्रीय देशों तक पहुंच रही है और हॉर्मुज में व्यावसायिक आवाजाही घट रही है।
आगे क्या देखना होगा
अगले 24 से 48 घंटे तीन बातों पर निर्णायक होंगे: क्या अमेरिका दक्षिणी ईरान के ढांचे पर हमले जारी रखता है, क्या ईरान खाड़ी देशों की ऊर्जा और जल सुविधाओं को दोबारा निशाना बनाता है, और क्या हॉर्मुज से गुजरने वाले जहाजों की संख्या और घटती है। फिलहाल पुष्टि इतनी है कि संघर्ष का दायरा बढ़ चुका है; दोनों पक्षों का दावा है कि वे सैन्य जरूरत के तहत कार्रवाई कर रहे हैं; और जोखिम यह है कि अगला कोई भी हमला क्षेत्रीय युद्ध को और चौड़ा कर सकता है।



